समाज

मिथ्या नहीं सच्चाई

कॉरपोरेट जगत में लव जिहाद की एंट्री

मिथ्या नहीं सच्चाई

बीते दिनों महाराष्ट्र के नासिक में टाटा कंसलटैंसी सर्विसेज़ (टीसीएस) में लव जिहाद, धर्म परिवर्तन, शारिरीक शोषण, मानसिक प्रताड़ना का मामला सामने आया है. जिसमें कंपनी में काम करने वाले नौं मुस्लिमों द्वारा सहकर्मियों के साथ गलत व्यवहार करके इस्लाम कबूल करने का दबाव बनाया जा रहा था, जिसे लेकर नौ एफआईआर दर्ज की गई हैं. मामले को गहराई से कवर करने वाली पत्रकार शुभी विश्वकर्मा ने द डोज़ियर की टीम से बातचीत की. जिसमें उन्होंने मामले के छिपे हुए पहलुओं को उजागर किया और बताया कि भारत में लव जिहाद कोई मिथ्या नहीं है बल्कि एक कड़वी सच्चाई है जिससे हमें जल्द से जल्द निपटना होगा.     

एस शिवा – आपको इस मामले के बारे में सबसे पहले कहां से पता चला?

शुभी विश्वकर्मा – इस मामले के बारे में मुझे लीगल राइट ऑब्जर्वेटरी करके एक एक्स हैंडल से पता चला था. इस मामले पर अधिकतर मीडिया में कहीं कोई रिपोर्ट नहीं छपी थी. जहां यह घटना हुई है उसे लेकर किसी को कोई अंदाज़ा नही था. वहां सभी एजुकेटिड लोग काम करते हैं. मतलब इंजीनियरिंग बैकग्राउंड वाले इंटेलेक्चुअल लोग जिनसे यह उम्मीद नहीं थी. आमतौर पर यह सब दूर-दराज की जगहों पर ही देखा जाता था. ऐसे में श्रीनीवासन जैन जैसे लोग जो लव जिहाद को प्रोपोगंडा मानकर किताबें पब्लिश करते हैं इस घटना पर चुप हैं. हमने यह भी देखा है कि इस केस ने लोगों को काफी हद तक डरा दिया है.

एस शिवा – मामले में कौन लोग शामिल थे?

शुभी विश्वकर्मा – यहां कुल नौ लोग शिकार हुए हैं. जिसमे से आठ महिलाएं हैं, दो शादीशुदा हैं बाकी छह अविवाहित हैं और एक लड़का है. इन सभी नौ लोगों ने शिकायत की थी कि उनके साथ दानिश शेख, तौसीफ अतर, रजा मेमन, शाहरुख कुरैशी, आसिफ अंसारी, सैफी शाफी शेख और एक लड़की निदा खान ने इस्लाम कबूल कराने का दबाव डाला. काम को लेकर परेशान किया और शारीरिक एंव मानसिक शोषण किया.

कंपनी में काम करने वाले एक लड़के को उसके परिवार में चल रही परेशानियों के कारण उसे इस्लाम में कन्वर्ट करने के लिए दबाव डाला जा रहा था. इस मामले में पहली एफआईआर 26 मार्च को की गई थी. जब एक दलित महिला पुलिस में अपनी शिकायत दर्ज कराती है. जिसके बाद 26 मार्च से 3 अप्रैल के बीच नौ एफआईआर रजिस्टर होती हैं. एक एफआईआर देवलाली पुलिस स्टेशन में रजिस्टर हुई और बची हुई आठ एफआईआर मुंबई नाका पुलिस स्टेशन में रजिस्टर हुई है. इनमें अभी तक एंटी कन्वर्ज़न लॉ को लेकर कोई सेक्शन नहीं लगाए गए हैं. दलित महिला की एफआईआर में एससी-एसटी एक्ट भी लगाया गया है. बाकी सभी एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता की अलग-अलग धाराएं जोड़ी गई हैं.

एस शिवा – पुलिस ने इस मामले को लेकर क्या कदम उठाए हैं?

शुभी विश्वकर्मा – पुलिस ने अभी तक छह लोगों को गिरफ्तार किया गया है. एक आरोपी निदा खान अभी फरार है. पुलिस ने एक एसआईटी गठित कर ली है. और एनआईए भी मामले में जांच कर रहा है. इस पूरे मामले में सबसे अधिक परेशानी दलित महिला को झेलनी पड़ी. क्योंकि उसे सेक्सुअली भी प्रताड़ित भी किया गया है.

दानिश नाम का लड़का इस महिला से कॉलेज के समय मिला था. एक दिन देवलाली कैंप एरिया में दोनों की मुलाक़ात हो गई. जिसके बाद दोनों में फिर से बातचीत चालू हो गई और दानिश महिला से कंपनी में नौकरी दिलाने का वादा करता है. वह महिला को उसकी मर्जी के बिना छुता है और किस करता है. जिसके बाद वह महिला का कंपनी में इंटरव्यू कराकर नौकरी दिला देता है. कंपनी में आने के बाद महिला दानिश, निदा और अन्य साथियों के साथ रहती है. वे महिला से भगवान को लेकर बेतुकी बातें बोलते थे. जैसे- क्या सच में महादेव हैं, कृष्ण तो वुमेनाइज़र हैं. वे द्रोपदी को चीप बताते थे और कहते थे गणेश कैसे शिव का पुत्र हो सकता है. इस तरह से वे महिला पर इस्लाम कबूल करने का दबाव बनाते थे.  

वह महिला दानिश और अन्य मुस्लिम साथियों की बातों से इस कदर प्रभावित हो गई थी कि वह अपने घर पर भी अलग-थलग रहने लग गई. खुले विचारों और पहनावें वाली महिला अब फुल स्लीव के कपड़े पहनने लग गई. हिजाब औढने लगी थी. रमज़ान आने पर घर में खाना नहीं खाने के लिए बहाने बनाती थी. खुद को कमरे में बंद रखती थी. उसने लिपस्टिक और बिंदी लगाना छोड़ दिया था. महिला में आए इस बदलाव पर उसकी एक सहेली ने गौर किया. और उसके घर वालों को बताया. परिवार के सामने बात आने पर उसने अपने परिवार वालों काफिर कहा और अल्लाह को इकलौता भगवान बताया. महिला के फ़ोन से नमाज़ पढ़ने की विडियों मिली जो उसे दानिश की पत्नी महरीन भेजा करती थी.

एस शिवा – क्या यह एक पूरा समूह है जो इस तरह धर्म परिवर्तन को एक साथ अंजाम देता है?

शुभी विश्वकर्मा – हां, महरीन, दानिश और अन्य साथी दलित महिला को अरब में रह रहीं महिलाओं के वीडियों दिखाया करते थे. और कहते थे कि तुम भी इसी तरह की जिंदगी जियोगी अगर इस्लाम कबूल कर लोगी. महिला के अकाउंट में 18 लाख रुपए भी डाले गए थे. इस मामले में बहुत सी पीड़ित 23, 24 साल से लेकर 35 साल तक की महिला भी है. जो 11 साल से आईटी सेक्टर में काम कर रही है और नासिक की ब्रांच में 7 साल से काम कर रही है.

कंपनी में काम करने वाले मुस्लिम बार-बार उनके कपड़ों पर कमेंट करते थे, उनकी बॉडी पर कमेंट करते थे, उनके चेस्ट एरिया पर देखते थे और अजीब तरह से आंख मारते थे. आगर वे शिकायत भी करती थी तो उनकी कोई सुनवाई नहीं होती थी. कंपनी की एचआर मैनेजर अश्विनी भी इन्हीं लोगों का सपोर्ट करती थी. इस केस में इनका पूरा नेटवर्क चल रहा था.

ईशा – क्या पुलिस की जांच में पता चला कि इतना पैसा कौन दे रहा है?

शुभी विश्वकर्मा – वह पैसा कहां से आया फिलहाल कोई नहीं जानता. शायद इसी की तहकीकात करने के लिए एनआईए को केस में शामिल किया गया है. इसमें टैरर फंडिग से लेकर ह्यूमन ट्रैफिकिंग वाले एंगल की भी जांच की जाएगी.  

ईशा – जो आरोपी अरेस्ट हुए हैं उनके साथ अभी क्या हो रहा है? किस जेल में है और उनकी तरफ से वकील कौन हैं?

शुभी विश्वकर्मा –  देखिए, इसमें से अभी छह-सात लोग अरेस्ट हुए हैं, जिसमें से छह जुडिशियल कस्टडी में है उन्हें जेल में भेजा गया है. एक पुलिस कस्टडी में है.

निदा के लिए एसआईटी गठित की गई है और उसे ढूंढा जा रहा है. पूरी संभावना है कि वह किसी कंजस्टेड मुस्लिम एरिया में ही कहीं पर छिपी हुई है. अभी इनके वकील सामने नहीं आए है. अभी यह 15 दिन के पुलिस रिमांड पर ही रहेंगे और उसके बाद कोर्ट आगे का निर्णय बताएगी.

हां, जो बात सामने आई है वह यह है कि जब इन्हें अरेस्ट किया गया तब एंटीसीपेटरी बेल के लिए जो रकम देने पेश की गई थी वह लाखों में थी. आठ आरोपियों के लिए इतनी जल्दी लाखों रुपए अरेंज हो जाना बड़ी बात है. कोई साधारण परिवार इतनी जल्दी इतने पैसों का इंतजाम नहीं कर सकता.

ईशा – क्या यह आपका पहला केस है? आपने अभी तक इस तरह के कितने मामलों को कवर किया है?

शुभी विश्वकर्मा – अभी तक जो मैंने धर्मांतरण के मामले देखे ते उनमें कम पढ़े लिखे लोग अधिक शामिल होते थे. इतने पढ़े-लिखे और इतनी बड़ी कंपनी में इस तरह का मामलो मैंने पहली बार देखा है. हालांकि कुछ समय पहले फरीदाबाद में ऐसा ही एक मामला हम देख चुके हैं. जिसमें डॉक्टर्स की पूरी गैंग शामिल थी.

इसके अलावा मध्य प्रदेश के भोपाल में सोरभ जैन का मामला भी कुछ ऐसा ही था. जो कन्वर्ट होकर मोहम्मद सलीम जैन बन गया था. आयुर्वेदिक के डॉक्टर डॉ. अशोक कुमार जैन के बेटे सोरभ का भी मुस्लिम दोस्त ने इसी तरह ब्रेन वॉश करके कन्वर्ट कर दिया था. जिसके बाद सोरभ की पत्नी मानसी ने भी सोरभ के साथ इस्लाम अपना लिया था.  

सोरभ ने उसने अपने करियर में 100 से भी ज्यादा लोगों का धर्मांतरण कराया और बार-बार अपने मम्मी-पापा पर भी धर्म बदलने का दबाव बनाता रहा. कुल मिलाकर प्रोफेसर, डॉक्टर, इंजीनियर कोई भी ऐसे नहीं है जिनका अंतिम लक्ष्य जिहाद नहीं हो. सब इसी मोटिव के साथ काम कर रहे हैं,

एक अन्य मामले में राशिद नाम का एक आरोपी यूपी से एक 17 साल की लड़की को ग्रूम किया. जिससे वह आर्य समाज के मंदिर में शादी करता है. फिर उसे सूरत ले जाता है जहां पर उससे निकाह करता है. वह लड़की का उसका तीन बार अबॉर्शन कराता है. सब कुछ करने के बाद उससे कहता है कि ‘एक काफिर को मुसलमान बनाने में एक हज का सवाब मिलता है.’ मतलब एक हज जाने का पुण्य मिलता है. इसलिए उसने यह किया.

ईशा – भारत में वामपंथी पत्रकार अक्सर लव जिहाद और इस तरह के घर्मांतरण के मामलों को झूठ बताते हैं. और हमेशा हिंदू को ही कटघरे में खड़ा करते हैं. आप इस बारे में क्या कहना चाहती हैं?

शुभी विश्वकर्मा – देखिए बिल्कुल यह वैसी ही बात है कि टेररिज्म का कोई रिलीजन नहीं होता. इतने सारी एक के बाद एक घटनाएं हो रहीं हैं फिर भी अगर वामपंथी सच्चाई को नहीं देख पा रहे तो जब ऐसी घटना इनके घर के किसी सदस्य के साथ होगी तभी उन्हें लव जिहाद सच लगेगा.

ईशा – आपने लव जिहाद के 300 से भी अधिक मामले कवर किए हैं. भारत सरकार या राज्य सरकारों के इसे लेकर उठाए कदमों को आप कितना सही मानती हैं? जो लोग इस तरह के मामलों में अरेस्ट होते हैं उन्हें क्या सज़ा मिली, उनका केस कहां तक पहुंचा? यह कोई नहीं जान पाता. इसको लेकर जो कदम उठाए जा रहे हैं, उसपर आप क्या कहेंगी?

शुभी विश्वकर्मा – बिल्कल, देखिए अभी तक एंटी कन्वर्जन लॉ या फ्रीडम ऑफ रिलीजन लॉ 12 राज्यों ने लागू कर दिया है. महाराष्ट्र भी अभी-अभी ही किया गया है. उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश में 10 साल तक की सजा का प्रावधान है. और इसमें ₹10,000 से लेकर ₹1 लाख तक का फाइन लगता है. इसमें कन्विक्शन क्यों कम होता है? इसका बहुत बड़ा कारण यह है कि बेल मिलने वाली धाराओं में अपराधियों को अरेस्ट किया जाता है जिससे दो-तीन साल में वे  बाहर आ जाते हैं और वापस से महिला को धमकाने लगते हैं.

दूसरा कारण यह है कि इन मामलों में महिला अधिकतर घर से भाग जाती है. जिसके बाद परिवार से संबंध नहीं के बराबर ही होता है. न ही वे नौकरी कर पाती हैं, न हीं किसी रिस्तेदार से कोई संपर्क होता है. धीरे-धीरे करके सबसे रिश्ते खत्म हो जाते हैं. वह अपने पैरों पर भी खड़ी नहीं हो सकती. ऐसे में वह केस कैसे लड़ेगी. उसके पास 500 रुपए भी नहीं होते वकील को देने के लिए. कई बार एनजीओ भी सपोर्ट करते हैं.

तीसरा, ऐसे मामलों में बहुत बार आउट ऑफ द कोर्ट सेटलमेंट हो जाता है. क्योंकि महिला के पास कोई और ऑप्शन ही नहीं होता. उसे झुककर हर हाल में लड़के के साथ रहना ही पड़ता है चाहे वह जिस भी हालत में रहे, चाहे वह दूसरी, तीसरी या चौथी पत्नी बनकर रहे.

एस शिवा – फिर ऐसे मामलों में सुधार कैसे किया जा सकता है?

शुभी विश्वकर्मा – हमें लड़कियों को लीगल एड देनी चाहिए. वरना पाकिस्तान से जिस तरीके के वीडियो आते हैं जहां पर लड़कियों को खींच-खींच कर ले जाया जाता है, कोर्ट में उनके माता-पिता के सामने उन्हें कन्वर्ट कर देते हैं. यह केस हमारे भारत में भी देखने को मिल जाएंगे. ऐसे मामलों से पीड़ित महिलाओं के लिए सेंटर बनाए जाएं. जहां वे जाकर रह सकें. कई मामलों में पुलिस लड़कियों तक पहुंच ही नहीं पाती है. और इसी तरह लड़कियों को फंसाकर डेमोग्राफिक शिफ्ट को अंजाम दिया जा रहा है.